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हमारी सनातन धर्म संस्कृति एवं आस्था के समागम से भारत विश्व गुरु बनेगा… दादा गुरु

आज नहीं तो कल पूरा विश्व हमारे धर्म एवं संस्कृति को अपनाएगा : जीव जगत ब्रह्मांड के सारे रहस्य नर्मदा जी में विद्यमान है

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। आज नहीं तो कल पूरा विश्व हमारे धर्म एवं संस्कृति को अपनाएगा। जीव जगत ब्रह्मांड के सारे रहस्य नर्मदा जी में विद्यमान है। देश के पहाड़ों से निकलने वाली गंगा, जमुना, गोदावरी कावेरी, नर्मदा केवल बहता पानी नहीं है, जीव जगत सृष्टि के पोषक के रूप में हमारी नदियों का निर्माण एवं संचालन में अमूल्य योगदान है। उक्त उदगार समीप बाकानेर में नर्मदा परिक्रमा कर रहे संत श्री दादा गुरु ने खेड़ापति हनुमान मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम नदियों की पूजा यूं ही नहीं करते यह सनातन धर्म की शक्ति है उनके कण कण पत्थर में शंकर जी विराजमान है इनके पत्थरों के ऊपर उभरती आकृतियां भी हमारे शोध का विषय है पश्चिमी देश अमेरिका जर्मनी सब हमारे सनातन धर्म के वेद पुराणों में छिपे रहस्य का अध्ययन कर रहे हैं परिक्रमा साधना से हमारे अंदर एक विश्वास जागेगा। हम कामनाओं एवं वासनाओं से मुक्त होंगे शब्द ही ब्रह्म है। यह पुराण वेद प्रमाणित करते हैं। मान नदी पर स्थित सातमात्रा देवीजी मातृशक्ति है इसलिए पूज्य है। अयोध्या के राम मंदिर केवल पत्थरों का मंदिर नहीं है। यह हमें सत्य के मार्ग पर ले जाने के मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का आदर्श राज्य चरित्र एवं अन्याय के विरुद्ध सत्य की जीत की प्रेरणा देता है। संत दादा गुरु को सुनने मनावर बकानेर क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।

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आयोजन के लिए ग्राम पंचायत बाकानेर एवं पुलिस प्रशासन एवं हनुमान मंदिर से जुड़े धर्म प्रेमी जनता का भरपूर सहयोग मिला नर्मदा जी की आरती के पश्चात उपस्थित परिक्रमा वासीयो एवं धर्म प्रेमियों के लिए भोजन प्रसादी के उचित व्यवस्था की है सवेरे 7:00 बजे नर्मदा जी के जय घोष के साथ दादा गुरु अगले पड़ाव उटावद हनुमान मंदिर, कालीबावडी के लिए रवाना हुए। दादा गुरुदेव 26 दिसंबर को मांडू होते हुए 27 दिसंबर को धामनोद पहुंचेंगे। पश्चात यात्रा जिले से बाहर प्रस्थान कर जाएगी

उल्लेखनीय हैं मां नर्मदा सेवा परिक्रमा के अंतर्गत अवधूत सिद्ध महायोगी दादागुरु की चौथी नर्मदा परिक्रमा निरंतर श्रद्धा, तप और सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। इसी क्रम में 15 सौ से अधिक नर्मदा परिक्रमावासियों के काफिले के साथ दादा गुरु का क्षेत्र में भव्य आगमन हुआ।

ग्राम पिपलाज, साततलाई, बाकानेर में ग्रामवासियों द्वारा आगवानी की गई। सत्संग के माध्यम से दादा गुरु ने मां नर्मदा की महिमा, प्रकृति संरक्षण, धर्म, धरा और गोवंशी रक्षा का संदेश देते हुए दादा गुरु ने कहा कि नर्मदा केवल नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी मां है, जिनका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। कड़ाके की ठंड के बावजूद दादा गुरु के क्षेत्र में प्रवेश पर ग्रामवासियों में उत्साह देखा गया और जगह-जगह पुष्पवर्षा व जयघोष के साथ स्वागत किया गया।

परिक्रमावासियों के लिए ग्रामवासियों द्वारा रात्रि विश्राम एवं भोजन की व्यवस्था की गई। पैदल नर्मदा परिक्रमा के तहत संत दादा गुरु का यह चौथी बार क्षेत्र में आगमन हुआ है। दादा गुरु की तप साधना स्वयं में अद्भुत और रहस्यमय विषय बन चुकी है। बताया जाता है कि वे लगभग पांच वर्षों से पूर्णतः निराहार हैं और केवल मां नर्मदा के जल पर आश्रित होकर जीवनयापन कर रहे हैं। दादा गुरु परिक्रमा अवधि में नर्मदा जल के अतिरिक्त कुछ भी ग्रहण नहीं करते।

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